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नवी मुंबई

नवी मुंबई का नया मुकाम: ₹5 लाख करोड़ के डेटा सेंटर हब में बदलने की तैयारी

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जानिए कैसे मुंबई का यह पड़ोसी शहर चुपचाप भारत के डिजिटल और एआई भविष्य की रीढ़ बन रहा है।

तकनीकी बदलाव

अगर आप भारत में स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, तो संभावना है कि आपकी तस्वीरें, यूपीआई भुगतान या ऑनलाइन वीडियो नवी मुंबई के किसी शांत औद्योगिक इलाके से होकर गुजर रहे हों। अब, यही इलाका एक बड़े बदलाव के लिए तैयार हो रहा है, जहां लगभग ₹5 लाख करोड़ का भारी-भरकम निवेश आने वाला है।

महाराष्ट्र सरकार नवी मुंबई और उसके आसपास के इलाकों (जैसे महापे, घंसोली और खालापुर) को देश की सबसे बड़ी ‘डेटा सेंटर राजधानी’ बनाने की तैयारी में है। राज्य का लक्ष्य 2030 तक अपनी क्षमता को 1 गीगावाट से बढ़ाकर 5 गीगावाट से अधिक करना है। इस दौड़ में गूगल, अमेज़न वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) और ब्लैकस्टोन जैसे वैश्विक दिग्गज करोड़ों रुपये की लागत से विशाल सर्वर फार्म बनाने के लिए जमीन खरीद रहे हैं।

लेकिन इसके लिए नवी मुंबई ही क्यों? इसका असली राज समुद्र के भीतर छिपा है। मुंबई तट पर उतरने वाली अंतरराष्ट्रीय अंडरसी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स से नवी मुंबई सीधे जुड़ी हुई है, जिससे बेहद तेज़ इंटरनेट स्पीड मिलती है। इसके अलावा, यहाँ बड़े औद्योगिक भूखंड और निर्बाध बिजली की उपलब्धता है, जो इन बिजली-भूखे डेटा सेंटरों को चौबीसों घंटे चलाने के लिए बेहद ज़रूरी है।

यह बदलाव सिर्फ मशीनों और सर्वरों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़ा आर्थिक जरिया भी है। इससे निर्माण, रियल एस्टेट और आईटी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में हज़ारों नए रोज़गार पैदा होंगे। जैसे-जैसे देश में 5G, ई-कॉमर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का दायरा बढ़ रहा है, नवी मुंबई भारत के डिजिटल भविष्य को रफ्तार देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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