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नवी मुंबई

बढ़ती लागत से संकट में मूर्तिकार, गणेश उत्सव से पहले मांगी सरकारी मदद

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शादू मिट्टी, प्राकृतिक रंगों और मजदूरी के दाम बढ़ने से सदियों पुरानी पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल मूर्ति कला पर आर्थिक संकट गहराया।

आर्थिक संकट

आगामी गणेश उत्सव से पहले निर्माण लागत में हुए भारी इजाफे से परेशान उरण के पारंपरिक गणेश मूर्तिकारों ने महाराष्ट्र सरकार से वित्तीय सहायता की गुहार लगाई है।

चिरनेर, कुंभारपाड़ा और जसई जैसे गांवों के कारीगर एक सदी से भी अधिक समय से पर्यावरण-अनुकूल शादू मिट्टी की मूर्तियां बना रहे हैं। ये कार्यशालाएं उरण, पनवेल, नवी मुंबई और मुंबई के प्रमुख बाजारों में मूर्तियों की आपूर्ति करती हैं। हालांकि, इस साल शादू मिट्टी की कीमत में प्रति यूनिट लगभग Rs 15 की बढ़ोतरी, महंगे प्राकृतिक रंग और मजदूरों की दिहाड़ी में लगभग Rs 2,000 की वृद्धि के कारण लागत काफी बढ़ गई है, जिससे मूर्तियों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं।

स्थानीय कारीगरों की लगातार मांगों के बावजूद, सरकार की ओर से अभी तक किसी वित्तीय सहायता या सब्सिडी की घोषणा नहीं की गई है। स्थानीय मूर्तिकारों का कहना है कि बढ़ती आर्थिक तंगी से राहत पाने और इस पारंपरिक व पर्यावरण-अनुकूल कला को जीवित रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सहयोग दिया जाना बेहद आवश्यक है।

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