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नवी मुंबई

नवी मुंबई महापौर कप: भक्ति और पर्यावरण-अनुकूल उत्सवों के लिए गणेशोत्सव मंडलों का सम्मान

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सार्वजनिक श्रेणी में ‘मोरया कल्चरल, आर्ट्स एंड स्पोर्ट्स मंडल’ ने प्रथम पुरस्कार जीता, इस वर्ष घरेलू गणेशोत्सव प्रतियोगिताओं की शुरुआत की गई।

पुरस्कार सम्मान समारोह

नवी मुंबई नगर निगम ने वाशी स्थित विष्णुदास भावे नाट्यगृह में ‘नवी मुंबई महापौर कप सार्वजनिक एवं घरेलू गणेशोत्सव प्रतियोगिता’ के पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाईक, महापौर सुजाता पाटिल और विधायक मंदा म्हात्रे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

इस प्रतियोगिता में कुल 269 सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों ने भाग लिया, जिनमें से 38 सेमीफाइनल तक पहुंचे और 13 को अंतिम पुरस्कारों के लिए चुना गया।

प्रमुख विजेता

  • सार्वजनिक श्रेणी:
    • प्रथम पुरस्कार: कोपरखैरने सेक्टर 17 के मोरया कल्चरल, आर्ट्स एंड स्पोर्ट्स मंडल ने प्रथम पुरस्कार जीता। इन्हें ₹70,000 की नकद राशि, एक ट्रॉफी और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
    • द्वितीय पुरस्कार: नेरुल सेक्टर 10 का अरुणोदय गणेशोत्सव मंडल दूसरे स्थान पर रहा।
    • तृतीय पुरस्कार: वाशी सेक्टर 17 का नवसाला पावणारा महाराजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल तीसरे स्थान पर रहा।
  • घरेलू गणेशोत्सव श्रेणी:
    • 5-दिवसीय श्रेणी: भावेश पारिया, भानुदास मालवी और नीलेश हंसाते ने क्रमशः पहले तीन स्थान हासिल किए।
    • 10-दिवसीय श्रेणी: एकनाथ भोईर, स्वरूप मोरे और मयूर गोलेकर ने शीर्ष तीन पुरस्कार जीते।
  • पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक श्रेणी:
    • प्रथम पुरस्कार: वाशी सेक्टर 16 के ‘गणराज वाशीचा राजा’ को मिला।
    • द्वितीय पुरस्कार: सीबीडी बेलापुर का क्लासिक मित्र मंडल।
    • तृतीय पुरस्कार: तुर्भे का A-टू-Z टाइप सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल।

इस पहल के तहत “छोटा रूप, बड़ी भक्ति” थीम के तहत भी मंडलों को सम्मानित किया गया, जिसका उद्देश्य छोटी मूर्तियों और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार उत्सवों को बढ़ावा देना था।

गणेश नाईक ने कानूनी दिशा-निर्देशों का पालन करने और बिना किसी अनावश्यक शोर-शराबे या दूसरों को असुविधा पहुँचाए त्योहार मनाने के लिए नवी मुंबई के मंडलों की सराहना की। खेल, सांस्कृतिक एवं युवा कल्याण समिति के अध्यक्ष गिरीश म्हात्रे ने कहा कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य भक्ति, सामुदायिक भागीदारी और पर्यावरण-अनुकूल उत्सवों को प्रोत्साहित करना था।

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