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नवी मुंबई

माथेरान में भू-क्षरण से मोरबे बांध के जलभंडारण क्षमता पर खतरा

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मानसून में बहकर आने वाली गाद से नवी मुंबई के लिए गहरा सकता है जल संकट।

क्षमता

पहाड़ी पर्यटन स्थल माथेरान में भारी मानसून बारिश के कारण पहाड़ों की ढलानों से बड़ी मात्रा में मिट्टी और गाद बहकर सीधे मोरबे बांध के कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) में पहुंच रही है, जिससे बांध की जलभंडारण क्षमता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। नवी मुंबई क्षेत्र के लिए पेयजल का मुख्य स्रोत होने के कारण मोरबे बांध की भंडारण क्षमता पर कोई भी प्रभाव पड़ना एक बड़ा नागरिक मुद्दा है।

पर्यावरणविदों और स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि हर साल जलाशय के तल में जमने वाली मिट्टी पानी की जगह ले रही है, जिससे बांध में पानी रोकने की कुल क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। समय के साथ क्षमता में यह गिरावट गर्मी के दिनों में या मानसून में देरी होने पर जल संकट के जोखिम को बढ़ा सकती है।

इसके अलावा, कीचड़युक्त पानी के आने से पानी का गंदलापन बढ़ता है, जिसे घरों तक पहुंचाने से पहले बड़े पैमाने पर फ़िल्टर और साफ़ करना पड़ता है। शहर की जल सुरक्षा को बनाए रखने के लिए विशेषज्ञ तत्काल सुधारात्मक कदमों की सलाह दे रहे हैं, जिसमें मुख्य कैचमेंट क्षेत्रों से गाद निकालने के साथ-साथ माथेरान की ढलानों पर चेक-डैम के निर्माण और वृक्षारोपण जैसे मृदा संरक्षण उपायों को लागू करना शामिल है, ताकि मिट्टी को जलाशय तक पहुँचने से पहले ही रोका जा सके।

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